Central Govt. Schemes 2015, 2016 and 2017

भारत सरकार द्वारा 2014, 2015, 2016 व 2017 में कई योजनाए सामाजिक, आर्थिक, बैंक व व्यापार, रोजगार, शिक्षा व स्किल के विकास, ग्रामीण क्षेत्र के विकास व insurance तथा पेंशन से जुड़े क्षेत्र में  लाई गयी है जिनकी सूची एक निश्चित क्रम में यहाँ पर राखी गयी है. इन योजनाओं में केन्द्र या राज्यों के बीच मध्य, राज्य विशिष्ट या संयुक्त सहयोग होता है।

B.R.I.C.S क्या है?

B.R.I.C.S की स्थापना की पहल 2006 में चार देशों - ब्राज़ील, रूस, भारत तथा चीन द्वारा की गयी थी. इन्ही देशों नाम के पहले अक्षरों के आधार पर इसका B.R.I.C (ब्रिक) नाम रखा गया. बाद में 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल हों जाने के बाद इसका वर्तमान नाम B.R.I.C.S (ब्रिक्स) हो गया. B.R.I.C.S  अर्थात् Brazil, Russia, India, China तथा South Africa विश्व के ऐसे पांच देशो का संगठन है, जिन्हें विश्व की उभरती हुई आर्थिक शक्तियां की संज्ञा दी जाती है. B.R.I.C.S  देशो का पहला शिखर सम्मलेन 2009 में आयोजित किया गया था, लेकिन B.R.I.C.S की शुरुआत 2006 में हुई थी. 

ब्रिक्स का विचार सबसे पहले वित्तीय सलाहकार कम्पनी गोल्डमेन सैक (Goldmen Sech) के अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने 2003 में दिया था. जिम ओ नील ने ब्रिक का विचार 2003 में प्रकाशित अपनी report "Dreaming with BRICS: The path to 2050" में दिया था. उनके अनुसार चार देशो- Brazil, Russia, India, China की विकास क्षमता इतनी अधिक है कि 2050 तक ये देश विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होगे. वर्तमान में अमेरिका तथा यूरोपियन संघ की अर्थव्यवस्थाएं विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं है. इस report के अनुसार चीन तथा भारत वस्तुओं तथा सेवाओ के उत्पादन में विश्व के सबसे बड़े निर्माताओं के रूप में उभर रहे है. वही दूसरी ओर रूस व ब्राज़ील विश्व के कच्चे माल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहे है. 

आज B.R.I.C.S ने अपने अस्तित्व के एक दशक पुरे कर लिए है. ब्रिक्स के पांच सदस्य देशों की कुल जनसँख्या 3.6 बिलियन है, जो विश्व की कुल जनसँख्या का 40% है. इसी प्रकार इन पांच देशों का घरेलू उत्पाद 16.6 ट्रिलियन डॉलर है, जो विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 22% है. इन आंकड़ों के आधार पर ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था व विश्व में उसके महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है.

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B.R.I.C.S  देशों के शिखर सम्मेलनों की सूची

ब्रिक्स देशों का नौवां शिखर सम्मलेन चीन के शहर जियामेन में 3-5 सितम्बर, 2017 को आयोजित किया गया था. इस सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था. इस सम्मलेन में पाँचों देशों के अध्यक्षों ने भाग लिया था तथा आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया था. इस शिखर सम्मलेन की मुख्य theme थी-"BRICS: Stronger Partnership for a Brighter Future".


ब्रिक्स (B.R.I.C.S) शिखर सम्मलेन
शिखर सम्मलेन
देश
स्थान
समय
पहला
रूस
येकैतारिन्बर्ग
16 June, 2009
दूसरा
ब्राज़ील
ब्रासिलिया
16 April, 2010
तीसरा
चीन
सान्या
14 April, 2011
चौथा
भारत
नई दिल्ली
29 March, 2012
पांचवा
दक्षिण अफ्रीका
डरबन
26-27 March, 2013
छठा
ब्राज़ील
फोर्टालेज़ा
14-17 July, 2014
सातवा
रूस
उफ़ा
8-9 July, 2015
आठवा
भारत
गोवा
14-15 October, 2016
नौवा
चीन
जियामेन
3-5 September, 2017
दसवां
दक्षिण अफ्रीका
प्रस्तावित
2018

ब्रिक्स का दसवां शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका में होना अनुमानित है.

B.R.I.C.S (ब्रिक्स) के उद्देश्य (Objectives)

ब्रिक्स का अपना कोई संविधान नही है, लेकिन इसके सम्मेलनों के अंत में जारी घोषणा पत्रों के आधार पर इसके निम्नलिखित उद्देश्य माने जा सकते है:-

  • विभिन्न क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच पारस्परिक लाभकारी सहयोग को आगे बढाना, जिससे इन देशों में विकास को गति प्रदान की जा सके.
  • एक न्यायपूर्ण तथा समतापूर्ण विश्व व्यवस्था की स्थापना जो किसी एक समूह के प्रभुत्व में न होकर बहुपक्षीय प्रकृति की हो. इसका मन्तव्य पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक व्यवस्था के स्थान पर एक नई बहुपक्षीय व्यवस्था की स्थापना करना है.
  • वर्तमान विश्व के प्रमुख मुद्दों जैसे जलवायु  परिवर्तन, आतंकवाद, विश्व व्यापार, आणविक ऊर्जा आदि का न्यायोचित समाधान.
  • विभिन्न वैश्विक मामलों में निर्णय निर्माण की प्रक्रिया का लोकतंत्रीकरण तथा इस दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, उदाहरण के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) में कोटा सुधार की मांग. 

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B.R.I.C.S की उपलब्धियां

शीत युद्ध के बाद में अर्थव्यवस्था के आकार तथा विकास की क्षमता के आधार पर ब्रिक्स, विश्व का एक महत्वपूर्ण संगठन है. पिछले एक दशक में ही इस संगठन ने विश्व में आर्थिक परिदृश्य पर अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है. इसकी दो उपलब्धियां है-

प्रथम- ब्रिक्स ने पश्चिमी पूँजीवादी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के स्थान पर एक बहुपक्षीय, खुली व   समतापूर्ण विश्वव्यवस्था के लिए निरंतर प्रयास किया है. World Bank के विकल्प के रूप में Development Bank की स्थापना इस दिशा में ठोस कदम है. 

दूसरा- ब्रिक्स के देशों ने आर्थिक, तकनीकी, व विकास के क्षेत्र में आपसी सहयोग को पिछले एक दशक में मजबूत किया है.

B.R.I.C.S की कमजोरियाँ

प्रथम- ब्रिक्स देशो की घोषित नीतियाँ तथा उनके वास्तविक व्यवहार में अंतर देखने में आया है. चीन ब्रिक्स के मंच से समेकित व लोकतान्त्रिक व्यवस्था की मांग उठाता है, लेकिन वही दक्षिण चीन सागर में वह अपने पड़ोसियों के ऊपर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है. 

दूसरा-  ब्रिक्स देशो के बीच आपसी विवाद अत्यंत गहरे है. तथा उनके बीच अघोषित सामरिक प्रतियोगिता भी चल रही है. भारत तथा चीन के बीच सीमा-विवाद सहित अन्य मतभेद जगजाहिर है. इन  विवादों व कमजोरियों के कारण ब्रिक्स अपनी क्षमता व प्रयासों के अनुरूप सफलता अर्जित नही कर सका है.

Bitcoin: का अर्थ व इससे जुड़े तथ्य (meaning and facts)

कहने को तो यह भी एक मुद्रा या करेंसी है। ठीक उसी तरह जैसे, भारत का रुपया है या अमेरिका का डॉलर है, लेकिन इसमें दो-तीन फर्क है। एक तो यह कि ज्यादातर मुद्राओं पर सरकार और उनके बैंकों का नियंत्रण होता है। इस प्रकार दुनिया की सारी मुद्राएँ नियम-कानूनों से बंधी है और लोगो को उनके जरिये लेन-देन करते वक़्त कानूनों व शर्तों का पालन करना पड़ता है। ऐसे में बिटकॉइन के रूप में एक ऐसी मुद्रा के बारे में सोचा गया, जो किसी भी सरकार और bank के नियंत्रण से बाहर हो और उस पर सरकारी नियम-कानूनों की बंदिश न हो। वर्ष 2009 में डिजिटल यानी वर्चुअल करेंसी के रूप में Bitcoin अस्तित्व में आया। बताया गया कि इसे सातोशी नकामोतो नामक व्यक्ति ने बनाया है। परन्तु आज तक इसको बनाने वाला सामने नही आया

दूसरी मुद्राओं की तुलना में Bitcoin से जुड़ा अंतर यह है कि यह करेंसी नोट या सिक्कों में न होकर एक प्रकार के कंप्यूटर कोड (computer code) के रूप में है। इन्हीं कोड को कंप्यूटर-इन्टरनेट की सहायता से खरीदा-बेचा जाता है। इनकी खरीद करने के बाद इन्हें ऑनलाइन वॉलेट में रखा जाता है। चूँकि ये कंप्यूटर पर बनाई और न दिखने वाली करेंसी है, इसलिए इन्हें क्रिप्टो-करेंसी भी कहा जाता है। अन्य मुद्राओं की अपेक्षा Bitcoin में अंतर और भी है। अन्य सभी करेंसियों पर चूँकि सरकार और bank का नियंत्रण होता है, इसलिए मुद्रास्फीति आदि कारकों के आधार पर देशों में जरुरत  के अनुसार जितने चाहे सिक्कों की ढलाई और नोटों की छपाई कर ली जाती है, लेकिन Bitcoin की संख्या तय है। इसके आविष्कारकर्ता ने जो मॉडल बनाया है, उसमे फ़िलहाल पूरी दुनिया में सिर्फ 2.1 करोड़ Bitcoin बनाने की व्यवस्था है। इनमे से 1.5 करोड़ Bitcoin फ़िलहाल प्रचलन में है। यह भी उल्लखेनीय है कि मौजूदा व्यवस्था मे हर 10 मिनट पर नये Bitcoin बनाने की छुट है, परन्तु संख्या हर हाल में 2.1 करोड़ ही रहेगी, उससे ज्यादा नही होगी, जब तक कि इसका मॉडल बदल नही दिया जाता। 

Bitcoin: सृजन और विस्तार (creation)

इसकी कीमत को देखकर आज दुनिया में हर व्यक्ति Bitcoin हासिल करना चाहता है. यह काम तीन तरीको से हो सकता है-
  1. Internet पर मौजूद Exchange Websites प्रचलित प्रमुख करेंसियों के बदले में Bitcoin उपलब्ध कराती है. इसी तरह कुछ Apps भी अपनी फीस लेकर Bitcoin बेचते है।
  2. एक अन्य तरीका है कि वस्तुओं या सेवाओं को बेचने के बदले उनका भुगतान Bitcoin से माँगा जाए।हैकर तो फिरौती की रकम ही Bitcoin में मांग रहे है। 
  3. तीसरा तरीका है Bitcoin की माइनिंग (mining)। माइनिंग से इसे हासिल करना एक कला है। Bitcoin चूँकि कंप्यूटर के माध्यम से बनाई यानी create की जाने वाली क्रिप्टो करेंसी है। इसलिए इसे बनाना काफी मुश्किल है। इसे बनाने की कुछ कुछ शर्ते है, जिनका पालन करना जरुरी है। इसके लिए सबसे पहले कंप्यूटर सिस्टम पर Bitcoin से जुड़ा Community Software Install करना होता है। Bitcoin हासिल करने की पूरी प्रक्रिया माइनिंग कहलाती है। Bitcoin की माइनिंग का काम शुरू होता है Bitcoin से जुड़े Community Software को Computer System पर install करने से। Software Download करने पर एक विशेष code generate होता है। यह खास code Bitcoin Address कहा जाता है। रकम का लेन-देन यानी Transaction  में यह code bank account की तरह काम करता है। कोड के जरिये व्यक्ति की पहुँच bitcoin के सार्वजनिक बहीखाते (लेजर) तक हो जाती है। जंहा उसे bitcoin के पुराने transaction (जिन्हें ब्लॉक कहा जाता है) की खोज करनी होती है। इसके Online बहीखाते में पुराने ब्लॉक्स की खोज करना और उसमे नए transaction दर्ज करवाना मुख्य रूप से यही दो काम bitcoin माइनिंग के तहत होते है. लेन-देन के पुराने विवरण में नए transaction दर्ज करवाना bitcoin माइनिंग है। इसके Online बहीखाते में जब नए transaction दर्ज होते है, तो पुराने transaction को मिलाकर एक ब्लॉकचेन बनती है। ब्लॉकचेन से ही यह तय होता है कि कोई लेन-देन हुआ है। माइनिंग की इस प्रक्रिया का असल मकसद यह सुनिश्चित करना होता है। कि यह काम पूरी तरह सुरक्षित ढंग से हो और इसमें किस तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे। माइनिंग करने वाले लोग माइनर कहलाते है। और माइनिंग करने के एवज में उन्हें फीस व नए bitcoin भी मिलते है। ध्यान रहे कि bitcoin माइनिंग का काम bank की पासबुक Update कराने जितना आसान नही होता। इस process को बेहद जटिल बनाया गया है। माइनिंग में सिर्फ हालिया transaction को ब्लॉक में जोड़कर bitcoin नही मिल जाते, बल्कि इसके लिए जटिल गणितीय पहेली भी हल करनी होती है। पहेली हल करने के बाद ही माइनर ब्लॉकचेन में नया ब्लॉक जोड़ने योग्य हो पाते है और इसके लिए वे Reward माइनर को transaction फीस और नए bitcoin हासिल करने का दावेदार ठहराते है। जब कोई माइनर एक ब्लॉक की खोज कर लेता है, तो उसे Reward के रूप में bitcoin की निश्चित संख्या मिलती है। bitcoin के माइनर यानी खनिक ही उसे बनाकर या हासिल करके दुसरे लोगो के बेचते है और इसके बदले फीस के रूप में रकम लेते है। 

Bitcoin की सुरक्षा (security)

Computer पर bitcoin हासिल करने पर इसका software download करना होता है, जिसकी प्रक्रिया शुरू करने पर एक ख़ास कोड मिलता है। इसे bitcoin address कहा जाता है। धनराशी के लेन-देन यानी transaction में यह कोड ही सबसे प्रमुख होता है, क्योंकि यही bank account की तरह काम करता है। bitcoin से किसी भी खरीदारी या लेन-देन के लिए यह कोड जरुरी है यदि आपको किसी को रकम भेजनी है, तो उसका bitcoin address आपके पास होना चाहिए। यदि आपको रकम हासिल करनी है, तो आपको अपना address उसे भेजना होगा। mobile phone पर मौजूद software या computer पर install किये गये प्रोग्राम से इस कोड के जरिये धनराशी भेजी जा सकती है। एक बार bitcoin generate होने के बाद इस code को user अपनी hard drive या pen drive में save कर सकता है। या अपनी virtual wallet में रख सकता है. कोड सुरक्षित होते है, लेकिन Digital Wallet नही। इसलिए इसे सुरक्षित रखने के लिए password का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, कागज पर कोड को प्रिंट करके सुरक्षित रखा जा सकता है। 

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Bitcoin के लाभ व हानियाँ (advantages & disadvantages)

Bitcoin के लाभ


  1. इस virtual currency के बेशुमार फायदे है, जैसे- इसे email भेजने की तरह दुनिया में कभी भी, कही भी, किसी को भी transfer किया जा सकता है, कोई  सरकार या bank इस currency पर सेंसरशिप नही लगा सकता है।
  2. इसके system को हैकिंग-प्रूफ  मन जाता है। फर्जी currency बनाना भी नामुमकिन है। क्योकि मैथमेटिकल कोड पर आधारित सिस्टम में फर्जी कोड generate नही हो सकता। 
  3. अगर कोई चाहता है कि पैसे transfer करने में न तो कोई bank या व्यक्ति आये और न ही transaction फीस ले, तो यह सिर्फ bitcoin में ही संभव है। 
  4. bitcoin में दशमलव के आठवें अंक तक छोटी रकम भेजी जा सकती है। जैसे 0.00000001 बीटीसी भी किसी को transfer किये जा सकते है। 

Bitcoin की हानियां  

  1. इसके जरिये होने वाली खरीदारी पूरी तरह गोपनीय होती है, सरकारी एजेंसिया इसके लेन-देन का पता नही लगा सकती, इसलिए इसका फायदा अपराधी उठाते है। 
  2. सरकारें इस पर टैक्स नही ले सकती, इस वजह से bank और सरकारें इसे वैधता नही देती है। 
  3. bitcoin को ज्यादातर देश इसलिए मान्यता नही दे रहे है, क्योकि इसके जरिये होने वाले खरीद-फरोख्त और इसके धारको का पता लगाना मुश्किल है। असल में money laundering यानी काले धन को सफ़ेद को में बदलने की प्रक्रिया में bitcoin काफी मददगार साबित हो रहे है। इस वजह से हवाला, टैक्स चोरी, ड्रग्स की खरीद-फरोख्त, हैकिंग और आतंकी गतिविधि में bitcoin के बढ़ते इस्तेमाल से सरकारे व एजेंसिया परेशान है।
bitcoin के पक्ष में तथा विपक्ष में कई विचार दिए जा चुके है परन्तु आज इसकी value तेजी से बढ़ रही है। और जापान जैसे देश ने इसे मान्यता भी दे दी है। bitcoin की तरह कई देश अपने यहाँ virtual currency की शुरुआत कर चुके है। परन्तु bitcoin की value इन सभी से ज्यादा है। 
आजकल आयोजित अधिकांश प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं SSC, UPSC, Railway व अन्य परीक्षाओं में, पुरस्कारों और उनके फील्ड नाम से सवाल पूछे जाते हैं। इसलिए, हम आपको कुछ महत्वपूर्ण पुरस्कार और उनके क्षेत्रों की एक सूची प्रदान कर रहे हैं जो आने वाली प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

यहाँ पर अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय महत्वपूर्ण पुरस्कारों की सूची दी जा रही है। जिनमे उनकी फील्ड की भी जानकारी दी गयी है।

International Awards and Honours List

  • Nobel Prize (नोबेल पुरस्कार): नोबेल पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक Alfred Bernhard Nobel (अल्फ्रेड बर्नहर्ड नोबेल) की स्मृति में दिए जाते है। भौतिक शास्त्र, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य तथा शान्ति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए नोबेल पुरस्कार दिए जाते है। अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार दिए जाने की शुरुआत 1969 ई. से हुई। इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहते है
  •  Pulitzer Prize (पुलित्जर पुरस्कार): New York World के प्रकाशक "Joseph Pulitzer"  की स्मृति में 1917 से America के कोलोम्बिया विश्वविद्यालय द्वारा पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में दिया जाता है
  • Ramon Magsaysay Award (रेमन मैग्सेसे पुरस्कार): यह पुरस्कार फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की स्मृति में वर्ष 1957 से प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार को एशिया का नोबेल भी कहा जाता है। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष 6 क्षेत्रों जैसे- जनसेवा, सरकारी सेवा, पत्रकारिता, जनसंचार, सामुदायिक नेतृत्व एवं अन्तराष्ट्रीय सदभाव के लिए प्रदान किया जाता है
  • Kalinga Prize (कलिंग पुरस्कार): विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए यह पुरस्कार Kalinga Foundation द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार प्रत्येक दो वर्ष में एक बार नवम्बर महीने में दिया जाता है
  • Grammy Award (ग्रेमी पुरस्कार): यह पुरस्कार The Recording Academy द्वारा पश्चिमी या अंग्रेजी संगीत की विभिन्न विधाओं में विशिष्ट योगदान देने वाले को प्रदान किया जाता है
  • Oscars or Academy Awards (ऑस्कर पुरस्कार): U.S.A की Academy of Motion Picture Arts and Sciences द्वारा फिल्म जगत के क्षेत्र में दिया जाता है. यह मीडिया का सबसे पुराना पुरस्कार समारोह मन जाता है।
  • Man Booker Prize (मैन बुकर पुरस्कार): इसका पूरा नाम Man Booker Prize for Fiction कहा जाता है। यह पुरस्कार समारोह United Kingdom में आयोजित किया जाता है। यह पुरस्कार Booker McConnell company एवं ब्रिटिश प्रकाशक संघ द्वारा संयुक्त रूप से साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए दिया जाता है


National Awards and Honours List


Peace, public service, social development, art & literature and science

  • International Gandhi Peace Prize (गाँधी शांति अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार): गाँधी शांति पुरस्कार भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की याद में दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है। विश्व शांति में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को भारत सरकार द्वारा 1995 से दिया जाता है
  • Jawaharlal Nehru Award (जवाहरलाल नेहरु अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार): भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय शांति, विभिन्न देशों के बीच मेलमिलाप व मित्रता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रदान किया जाता है
  • Indira Gandhi Prize for Peace, Disarmament and Development (इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार): यह पुरस्कार प्रतिवर्ष Indira Gandhi Memorial Trust द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति (Peace), निरस्त्रीकरण (Disarmament) एवं विकास (Development) के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए दिया जाता है
  • Bharat Ratna (भारत रत्न): यह कला, साहित्य तथा विज्ञान या बड़े पैमाने पर जनसेवा (Public service) में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए देश का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार (National award) है

Distinguished achievements/service in all fields of activities(गतिविधियों / विषयों के सभी क्षेत्रों में प्रतिष्ठित उपलब्धियां / सेवा के लिए)

  • Padma Awards (पद्म पुरस्कार): यह भारत रत्न के बाद दूसरा बड़ा सम्मान है। ये पुरस्कार, विभिन्न क्षेत्रों जैसे कला, समाज सेवा, लोक-कार्य, Science और Engineering, Business और Industry, Treatment, साहित्य और शिक्षा, खेल-कूद, Civil Service आदि के संबंध में प्रदान किए जाते हैं। ये पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर Announced और आम तौर पर मार्च / अप्रैल महीने में  भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किये जाते हैं। यह पुरस्कार तीन प्रकार के है-
    1. Padma Vibhushan (पद्म विभूषण),
    2. Padma Bhushan (पद्म भूषण),
    3. Padma Shri (पद्मश्री)

Gallantry Awards (शौर्य पुरस्कार)

  • Param Vir Chakra (परमवीर चक्र): भारत में वीरता के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार जिसे Army, Air Force, Navy, के सैनिको को दुश्मन के सामने बहादुरी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन या soul Sacrifice के लिए दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1950 में की गयी थी।
  • Maha Vir Chakra (महावीर चक्र): देश का यह दूसरा सर्वोच्च शौर्य पुरस्कार उस बहादुर सैनिक को प्रदान किया जाता है, जिसने शत्रु के दमन में अद्वितीय (Unique) पराकर्म प्रदर्शित किया है
  • Vir Chakra (वीर चक्र): शौर्य (Bravery) एवं वीरता का तीसरा सर्वोच्च पुरस्कार उसे प्रदान किया जाता है, जिसने शत्रुओ का सामना Indomitable साहस करके उसे पीछे धकेला हो अथवा मौत के घाट उतार दिया हो।
  • Ashoka Chakra (अशोक चक्र पदक): यह देश का सर्वोच्च शांतिकालीन शौर्य पुरस्कार है। यह पुरस्कार भी शौर्य प्रदर्शन में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले बहादुर कर्मी को प्रदान किया जाता है
  • Kirti Chakra (कीर्ति चक्र): यह पुरस्कार उस वीर सैनिक को प्रदान किया जाता है, जिसने शत्रु के मुकाबले में अभूतपूर्व साहस का प्रदर्शन किया हो
  • Shaurya Chakra (शौर्य चक्र): युद्ध की परिस्थितिओं में अदभुत शौर्य प्रदर्शित करने वाले शूरवीरों को यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है

Indian Film Industry (भारतीय सिनेमा)

  • Dadasaheb Phalke Award (दादा साहेब फाल्के पुरस्कार): दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की स्मृति में स्थापित यह पुरस्कार सुचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting), भारत सरकार द्वारा उस व्यक्ति को दिया जाता है,जिसने भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान दिया हो

literary honor and Award (साहित्यिक सम्मान)

  • Sahitya Akademi Award (साहित्य अकादमी पुरस्कार): अंग्रेजी सहित 22 भाषाओँ में पिछले 5 सालों में प्रकाशित उत्कृष्ट (Excellent) रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत सरकार द्वारा दिया जाता है। यह एक साहित्यिक सम्मान है। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1954 से हुई थी।
  • Jnanpith Award (भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार): संविधान की 8वीं अनुसूची में उल्लेखित 22 भाषाओँ में से किसी भी भाषा में उत्कृष्ट साहित्य के सृजन के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उनके साहित्य के प्रति उत्कृष्ट योगदान के लिए एक लेखक को सालाना प्रस्तुत एक भारतीय साहित्यिक पुरस्कार के रूप में दिया जाता है।
  • Moortidevi Award (मूर्तिदेवी पुरस्कार): भारतीय जीवन के Eternal मूल्यों को उभारने के लिए किसी भी भारतीय भाषा या अंग्रेजी साहित्य में Bharatiya Jnanpith द्वारा दिया जाता है
  • Bharat Bharati Honor (भारत-भारती सम्मान): उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य सृजन व हिंदी की अनवरत सेवा हेतु प्रदान किया जाता है
  • Vyas Samman (व्यास सम्मान): हिंदी लेखन के क्षेत्र में अविस्मरणीय (Unforgettable) योगदान हेतु K.K. Birla Foundation द्वारा प्रदान किया जाता है. इसकी शुरुआत 1991 से की गयी थी।
  • Vachaspati Puraskar (वाचस्पति पुरस्कार): संस्कृत साहित्य में विशिष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए K.K. Birla Foundation द्वारा प्रदान किया जाता है
  • Saraswati Samman (सरस्वती सम्मान): संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में पिछले 10 सालों में प्रकाशित उत्कृष्ट साहित्य कृति के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार भी K.K. Birla Foundation द्वारा प्रदान किया जाता है

Social work, Science & Technology, women and Child Welfare (सामाजिक कार्य, विज्ञान व तकनीक, महिला और बाल कल्याण के लिए)

  • Jamnalal Bajaj Award (जमनालाल बजाज पुरस्कार): सामजिक कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान,ग्रामीण विकास, Science व Technology के उपयोग तथा महिलाओं एवं बच्चों के उत्थान एवं कल्याण कार्यों हेतु Jamnalal Bajaj Foundation के द्वारा प्रदान किया जाता है
  • Shanti Swaroop Bhatnagar Award (शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार): विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है
  • Dhanvantari Award (धन्वन्तरि पुरस्कार): चिकित्सा के क्षेत्र में दिया जाने वाला पुरस्कार। 

Sports and Games (खेल के क्षेत्र में)

  • Arjuna Award (अर्जुन पुरस्कार): अर्जुन पुरस्कार खेल के क्षेत्र में खिलाड़ी के अच्छे प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1961 से हुई थी
  • Dronacharya Award (द्रोणाचार्य पुरस्कार): खेल प्रशिक्षण के क्षेत्र में खेल मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत 1985 में की गयी थी। यह पुरस्कार ओलंपिक खेलों, पैरालिंपिक खेलों, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप और क्रिकेट, स्वदेशी खेलों आदि जैसे खेलो के लिए दिए जाते है। यह खेलो में उत्कृष्ट कोचों अथवा प्रशिक्षको के रूप में माना जाता है। 
  • Dhyan Chand Award (ध्यानचंद पुरस्कार): यह पुरस्कार खेलों में जीवन भर की उपलब्धियों के रूप में माना जाता है। इस पुरस्कार का नाम प्रसिद्ध हॉकी के खिलाडी ध्यानचंद सिंह के नाम पर रखा गया है। खेल एवं युवा मंत्रालय सन् 2002 से ये पुरस्कार हर वर्ष प्रदान करता है। 
  • Rajiv Gandhi Khel Ratna (राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार): खेलों में सराहनीय प्रदर्शन हेतु प्रदान किया जाता है।  यह खेलो में प्रदान किया जाने वाला भारत का सबसे प्रसिद्ध पुरस्कार है। 


भारतीय संविधान में हुए कुछ महत्वपूर्ण संविधान संशोधन


    संविधान संशोधन 
   (Constitution amendment)
           प्रावधान (Provision)
   
प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951

मौलिक अधिकारों में समानता, स्वतंत्रता तथा संपत्ति के अधिकार को सीमित किया गया.

          
द्वितीय संविधान संशोधन अधिनियम, 1952

लोक सभा चुनाव के लिए प्रतिनिधित्व के अनुपात को पुन: समायोजित किया गया.
          
सांतवा संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
   पुनर्वितरण.
   राज्यों का पुनर्गठन-14 राज्य तथा 6 केन्द्रशासित प्रदेश.
      संघ राज्य क्षेत्र का प्रावधान.
          
10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961

दादर तथा नगर हवेली को भारत का अंग बनाया गया.
          
12वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

गोवा, दमन एवं दीव को भारत का अंग बनाया गया.

13वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

कुछ विशेष उपबंधों के साथ नागालैंड को नया 
   राज्य बनाया गया.

14वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

पुदुचेरी को भारत का अंग बनाया गया.

21वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1967

सिन्धी भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मलित किया गया.

22वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1969

मेघालय को नया राज्य बनाया गया.

26वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971

भूतपूर्व देशी राज्यों के शासकों की विशेष
   उपाधियों एवं उनके प्रिवी-पर्स को समाप्त कर दिया गया.

31वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1973

इसके द्वारा लोक सभा के सदस्यों की संख्या 
   525 से 545 कर दी गयी तथा केन्द्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व 25 से घटाकर 20 कर दिया गया.

36वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1975

सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाया गया.

39वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1975

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्षके निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक पुनर्विचार से मुक्त रखा गया.


42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976

संविधान की प्रस्तावना में पंथनिरपेक्ष,      समाजवादी तथा अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए.
नीति निदेशक सिद्धांतों को मौलिक अधिकारों  पर वरीयता दी गयी.
संविधान में अनुच्छेद 51(क) के अंतर्गत 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए.
राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह को मानना  अनिवार्य कर दिया गया.
लोक सभा एवं विधानसभाओं की अवधि को   5 साल से बढाकर 6 साल कर दिया गया.


44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978

राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा ‘आंतरिक       अशांति’ के आधार पर नही की जा सकती, बल्कि सशस्त्र विद्रोह के कारण की जा सकेगी.
संपत्ति के मूल अधिकार को विधिक अधिकार में परिवर्तित कर दिया गया.
लोक सभा तथा विधान सभाओं की अवधि को 6 साल से घटाकर 5 साल कर दिया गया.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को शक्तिशाली बनाया गया. 

52वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1985

संविधान में दसवीं अनुसूची को जोड़कर दल-बदल को रोकने के लिए कानून बनाया गया.

61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1989

मतदान करने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से 
   घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी.

71वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992

कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली भाषाओँ को 8वी अनुसूची में शामिल किया गया.

73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1993

पंचायती राज संबंधी प्रावधान किये गए.
11वीं अनुसूची जोड़ी गयी.

74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1993

12वीं अनुसूची जोड़ी गयी तथा नगरपालिकाओं 
   के गठन संबंधी प्रावधान किये गये.

86वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002

संविधान में अनुच्छेद-21(क), 45 तथा 51(क)(ज्ञ) जोड़ा गया.
राज्य द्वारा 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को  निशुल्क: और अनिवार्य सेवा का प्रावधान किया गया.

87वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

परिसीमन में जनसँख्या का आधार 1991 की जनगणना के स्थान पर 2001 कर दिया गया.

91वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

दल-बदल व्यवस्था में संशोधन किया गया. अब केवल सम्पूर्ण दल के विलय को मान्यता है.
केंद्र तथा राज्यों में मंत्रिपरिषद की संख्या क्रमश: लोक सभा तथा विधान सभा की सदस्य संख्या 15% से अधिक नहीं होगी.

92वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

डोगरी, मैथिली, बोडो और संथाली भाषाओँ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया.

94वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2006

अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए एक 
   मंत्री का प्रावधान मध्य प्रदेश एवं ओडिशा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में भी किया गया.

96वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011

‘उड़िया’ भाषा का ‘ओडिया’ में परिवर्तन किया 
   गया.

97वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011

इस संशोधन के द्वारा सहकारी समितियों को एक संवैधानिक स्थान एवं संरक्षण प्रदान किया गया.

98वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2012

संविधान में अनुच्छेद 371(J) शामिल किया गया. इसका उद्देश्य कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के विकास हेतु कदम उठाने के लिए सशक्त करना था.

99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2013

यह अधिनियम प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायिक
   नियुक्ति आयोग (N.J.A.C) की संरचना एवं कामकाज हेतु संविधान की विभिन्न अनुच्छेद 124(2),127(1), 128, 217(1) व (2) तथा 224(क) में संशोधन किया गया.

100वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014

इस विधेयक का उद्देश्य भारत एवं बांग्लादेश के मध्य 41 वर्ष पुराने भू-सीमा समझौता L.B.A 1974 को प्रभाव में लाना है.

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