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Lok sabha passed FCRA (amendment act) bill without a debate
Lok Sabha passed a bill called F.C.R.A

Foreign Contribution (Regulation) Act

लोक सभा द्वारा बिना किसी बहस के Foreign Contribution (Regulation) Act (F.C.R.A) विधेयक में संशोधन पारित किया है. यह एक्ट के तहत अब राजनितिक पार्टियों को साल 1976 से अब तक मिले विदेशी चंदे की जांच नहीं हो सकेगी. 
मोदी सरकार द्वारा वित्त विधेयक (2016) में सुधर किया गया ताकि पार्टियों को विदेशी धन जमा करने में आसानी हो.

Foreign Contribution (Regulation) Act (F.C.R.A) क्या है? 

F.C.R.A-2010 को वर्ष 1976 में पास किया गया था. ये विधेयक भारतीय कंपनियों या विदेशी कंपनियों (जो रजिस्टर्ड है) को राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने से रोकता था. परन्तु इसको बाद में निरस्त कर दिया गया था.  
सरकार ने वित्त अधिनियम 2016, की परिभाषा को ये कहते हुए बदल दिया कि जिस कंपनी के पास 50 प्रतिशत से भी कम विदेशी कैपिटल होगी तो उसे विदेशी कंपनी का दर्जा नहीं दिया जायगा. और यह संशोधन 2010 से प्रभाव में आया.

प्रभाव

  • 1976 से अब तक पार्टियों को मिलने वाले चंदे की किसी भी प्रकार की कोई जांच नहीं हो सकती है.
  • अब सभी पार्टियां आसानी से विदेशो से चंदा ले सकती है.
  • इस संशोधन से से BJP और Congress पार्टी को 2014 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने F.C.R.A के उल्लंघन के  दोषी करार दिया गया था. अब इस संशोधन से दोनों पार्टियों को रहत मिल जायगी. 
  • और इसके साथ साथ विभिन्न पार्टियों को मिलने वाले चंदे पर भी किसी प्रकार की कोई जांच नहीं होगी.

भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस : विकास, आवश्यकता और चुनौतियाँ

कॉर्पोरेट गवर्नेंस क्या है?-Corporate Governance

साधारण शब्दों में Corporate Governance का संबंध उन तौर तरीकों से है, जिनके माध्यम से Corporate संस्थाएं चलाई जाती है.
Corporate Governance की संरचना कंपनी के बोर्ड (board), प्रबंधको (managers) , शेयरधारको (shareholders) एवं अन्य हितधारकों (stakeholders) सहित कंपनी के विभिन्न हितधारकों के बीच अधिकारो एवं जिम्मेदारियों का बाँटना सुनिश्चित करती है.
Corporate Governance का प्रमुख उद्देश्य संसाधनों का इष्टतम (optimal) उपयोग करने के साथ साथ शेयरधारको (shareholders) की संपत्ति में वृद्धि करना है.



भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की आवश्यकता- Need of Corporate Governance 

भारत अभी तक अपनी कानूनी एवं विनियामक प्रणालियों तथा प्रवर्तन क्षमताओं का पूरी तरह से विकास नहीं कर पाया है. निजी क्षेत्र की संस्थाएं विकसित देशों के समान सुविकसित नहीं है.

पारदर्शिता (Transparency) और प्रकटीकारण मानदंडो (Disclosure Norms) की कमी के साथ साथ कंपनी के खातों की गलत जानकारी देने की घटनाएं ऐसे मुद्दे है जिनके जल्दी समाधान किये जाने की आवश्यकता है.

बाजार में कंपनियों की बड़ी संख्या को देखते हुए रिपोर्टिंग और जवाबदेही के मानकों में कमजोरी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.
इसलिए उपर लिखे इन का कॉर्पोरेट क्षेत्र के कारकों या कमियों की वजह से भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की आवश्यकता है.



भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का विकास-Development of corporate governance in India 

उदारीकरण (Liberalization) और निजीकरण (Privatization) के बाद भारत में अच्छे Corporate Governance हेतु फ्रेमवर्क (framework) तैयार करने के संबंध में सिफारिश करने के लिए A.S.S.O.C.H.A.M, S.E.B.I और C.I.I ने समितियां गठित की थी.

बाद में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने वैश्विक वित्तीय संकट और भारत में बड़ी कंपनियों के असफल होने के मद्देनजर Corporate Governance स्वैच्छिक दिशानिर्देश 2009 निर्धारित किये थे. इनका उद्देश्य पारदर्शित, नैतिक और उत्तरदायी कॉर्पोरेट गवर्नेंस फ्रेमवर्क का निर्माण करना है.

भारत में कंपनियों के विनियम से सम्बंधित प्रमुख क़ानून कंपनी अधिनियम, 2013 है. इसके अतिरिक्त, S.E.B.I अधिनियम, 1992 द्वारा भी कंपनियां विनियमित होती है.

क्या कहता है कंपनी अधिनियम, 2013

पूर्वर्ती कंपनी अधिनियम, 1956 के स्थान पर यह नया कंपनी अधिनियम लागू किया गया है.
इसमें लेखापरीक्षा समिति का गठन करने का प्रावधान किया गया है, जिसमे कम से कम तीन निदेशक सदस्य शामिल होंगे और उनमे स्वतंत्र निदेशकों का बहुमत होगा.

प्रत्येक निदेशक को अधिनियम में विहित प्रक्रिया के अनुसार किसी कंपनी, कॉर्पोरेट निकाय, फर्म तथा पक्षकारों आदि में अपने हितों का खुलासा करना होता है.

इस अधिनियम के अनुसार कतिपय कंपनियों को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (C.S.R) समिति का गठन करना होता है. इस समिति को कंपनी की C.S.R पहलों की योजना बनाने, सिफारिश करने और निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है.

भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चुनौतियाँ व सुधार-Challenges & Improvements

चुनौतियाँ

प्रमुख शेयरधारक अपने हितों को पूरा करने के लिए कंपनी के संसाधनों पर एकाधिकार प्राप्त कर लेते है. बहुमत रखने वाले शेयरधारको (majority shareholders) और अन्य हितधारको के बीच स्पष्ट एजेंसी गैप दिखाई देता है.
पश्चिमी देशों के विपरीत भारत में बोर्डों और स्वतंत्र निदेशकों को सामान्यत शक्तियां प्रदान नहीं की जाति है और वे शेयरधारको की इच्छानुसार निर्णय लिए जा सके.

सुधार की आवशयकता 

स्टॉक एक्सचेंजों का विकास शेयर के स्वामित्व का पंजीकरण की प्रणाली का विकास करने, अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने के लिए क़ानून बनाने, सतर्कता वित्तीय प्रेस का सशक्तिकरण करने तथा लेखापरीक्षा एवं लेखांकन (Audit and Accounting) मानकों में सुधार करने की आवश्यकता है.

विचारधारा के स्तर पर विभिन्न हितधारकों के मन में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के प्रति व्यापक सहनशीलता के खिलाफ स्थाई परिवर्तन लाना होगा.

धरोहर गोद लो योजना क्या है?-(Adopt a Heritage Scheme)

देश के एतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्मारकों के रखरखाव पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए ''धरोहर गोद लो योजना" (Adopt a Heritage Scheme) का शुभारम्भ पर्यटन मंत्रालय द्वारा किया गया है. अनेक कंपनियां ने स्मारक गोद लेने की योजना में रूचि व्यक्त की. इस दिशा में विभिन्न कंपनियों से प्राप्त कुल 57 प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण कर आतिथ्य यात्रा व बैंकिंग क्षेत्र की सात कंपनियों को 'स्मारक मित्र' के रूप में पर्यटन मंत्रालय द्वारा चुना गया तथा 14 विभिन्न स्मारकों को 'धरोहर गोद लो योजना' के तहत स्मारक मित्र के लिए आशय पत्र (Letters of Intent) पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये. इन्हें यह आशय पत्र 25 अक्टूबर, 2017 को केंद्र सरकार के पर्यटन पर्व के अंतिम दिन प्रदान किये गए.

गोद लेने के लिए चयनित कंपनियों की सूची-(List of selected companies) 


गोद लेने के लिए चयनित 7 कंपनियों व उन्हें गोद दिए गये स्मारकों के नाम निम्नलिखित है-

  • दिल्ली में स्थित जंतर-मंतर  SBI Foundation को गोद दिया गया.
  • कोणार्क का सूर्य मंदिर, भुवनेश्वर का राजा रानी मंदिर, जयपुर और ओडिशा के रत्नागिरी स्मारक टी इंटरनेशनल लिमिटेड को गोद दिया गया.
  • कर्नाटक के हम्पी, जम्मू-कश्मीर के लेह पैलेस, दिल्ली का कुतुबमीनार, महाराष्ट्र की अजंता गुफा यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड को गोद दिया गया.
  • कोच्चि के मत्तानचेरी पैलेस संग्रहालय और दिल्ली का सफदरजंग मकबरा ट्रेवल कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को गोद दिया गया.
  •  गंगोत्री मंदिर क्षेत्र और गोमुख तक के मार्ग और जम्मू-कश्मीर के माउंट स्टोककांगरी , लद्दाख एडवेंचर टूर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया को गोद दिया गया.
  • दिल्ली की अग्रसेन की बावड़ी स्पेशल हॉलीडेज ट्रेवल प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली के रोटरी क्लब को गोद दिया गया.
  • दिल्ली के पुराने किले को N.B.C.C को गोद दिया गया.
विश्व पर्यटन दिवस (27 सितम्बर, 2017) को राष्ट्रपति ने पर्यटन मंत्रालय की यह 'एक धरोहर गोद ले योजना' का शुभारम्भ किया था इसके बाद पर्यटन मंत्रालय ने निजी, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और कॉर्पोरेट जगत के व्यक्तियों को स्मारक स्थलों को गोद लेने और संरक्षण तथा विकास के माध्यम से स्मारकों और पर्यटन स्थलों को स्थाई बनाने का दायित्व निभाने के लिए आमंत्रित किया था. यह योजना संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय का प्रयास है. इसके जरिये देशभर के स्मारकों, धरोहरों और पर्यटन स्थलों को विकसित कर पर्यटक अनुकूल बनाने के लिए योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पर्यटन सम्भावना तथा सांस्कृतिक महत्व को बढाना है.




सौभाग्य योजना क्या है?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हर घर तक बिजली सुनिश्चित करने के लिए एक नई योजना "प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना" (Pradhan Mantri Sahaj Bijli Har Ghar Yojna) -'सौभाग्य' का शुभारम्भ किया है.

योजना के प्रमुख पॉइंट्स


  • इस योजना का उद्देश्य सभी घरों को बिजली प्रदान करना है अर्थात् उन सभी 4 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान करना जिनके पास वर्तमान में बिजली कनेक्शन नही है. ये कनेक्शन गरीबों को मुफ्त में प्रदान किये जायेंगे.
  • इस योजना की कुल लागत 16,320 रु है. केंद्र सरकार इस योजना के लिये राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता प्रदान करेगी.
  • इस योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 दिसम्बर, 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुँचाने का कार्य पूर्ण करना होगा.
  • योजना के अंतर्गत नि:शुल्क बिजली कनेक्शन के लिए लाभकर्ता का चयन वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (S.E.C.C.) द्वारा किया जाएगा.
  • इसके साथ ही S.E.C.C. आंकड़ो के तहत बिना बिजली वाले घरों में भी मात्र 500 रु के भुगतान द्वारा कनेक्शन प्रदान किये जाएँगे. यह राशि बिजली बिल की 10 किस्तों में वापस की जाएगी.
  • दुर्गम उअर दूर-दराज के क्षेत्रों में बिना बिजली वाले घरों में बैटरी बैंक सहित 200 से 300 W.P. वाले सौर ऊर्जा पैक प्रदान किये जाएँगे. इसमें 5 L.E.D. लाइट, 1 DC पंखा और एक DC  पॉवर प्लग सम्मिलित होंगे. इसके साथ ही पांच वर्षो तक मरम्मत और देखभाल भी की जाएगी.
  •  योजना को सरल और तेज़ी से लागू करने के लिये घरों के सर्वेक्षण हेतु मोबाइल एप का प्रयोग किया जाएगा.
  • योजना के अंतर्गत लाभकर्ताओ की पहचान, बिजली कनेक्शन के लिये आवेदन, आवेदक का चित्र और पहचान का प्रमाण हाथों हाथ पंजीकृत किया जाएगा.
  • ग्रमीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/ सार्वजनिक संस्थान को पूर्ण दस्तावेजो के साथ आवेदन-पत्रों को एकत्र करने, बिल वितरित करने और पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी निकायों के साथ विचार-विमर्श के बाद बिल जमा करने के लिए अधिकृत किया जा सकता है. 
  • Rural Electrification Corporation Limited (REC) देशभर में योजना के संचालन के लिये नोडल एजेंसी होगी.

भारतीय संविधान में हुए कुछ महत्वपूर्ण संविधान संशोधन


    संविधान संशोधन 
   (Constitution amendment)
           प्रावधान (Provision)
   
प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951

मौलिक अधिकारों में समानता, स्वतंत्रता तथा संपत्ति के अधिकार को सीमित किया गया.

          
द्वितीय संविधान संशोधन अधिनियम, 1952

लोक सभा चुनाव के लिए प्रतिनिधित्व के अनुपात को पुन: समायोजित किया गया.
          
सांतवा संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
   पुनर्वितरण.
   राज्यों का पुनर्गठन-14 राज्य तथा 6 केन्द्रशासित प्रदेश.
      संघ राज्य क्षेत्र का प्रावधान.
          
10वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1961

दादर तथा नगर हवेली को भारत का अंग बनाया गया.
          
12वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

गोवा, दमन एवं दीव को भारत का अंग बनाया गया.

13वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

कुछ विशेष उपबंधों के साथ नागालैंड को नया 
   राज्य बनाया गया.

14वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1962

पुदुचेरी को भारत का अंग बनाया गया.

21वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1967

सिन्धी भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मलित किया गया.

22वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1969

मेघालय को नया राज्य बनाया गया.

26वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971

भूतपूर्व देशी राज्यों के शासकों की विशेष
   उपाधियों एवं उनके प्रिवी-पर्स को समाप्त कर दिया गया.

31वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1973

इसके द्वारा लोक सभा के सदस्यों की संख्या 
   525 से 545 कर दी गयी तथा केन्द्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व 25 से घटाकर 20 कर दिया गया.

36वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1975

सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाया गया.

39वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1975

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्षके निर्वाचन संबंधी विवादों को न्यायिक पुनर्विचार से मुक्त रखा गया.


42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976

संविधान की प्रस्तावना में पंथनिरपेक्ष,      समाजवादी तथा अखंडता जैसे शब्द जोड़े गए.
नीति निदेशक सिद्धांतों को मौलिक अधिकारों  पर वरीयता दी गयी.
संविधान में अनुच्छेद 51(क) के अंतर्गत 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए.
राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल की सलाह को मानना  अनिवार्य कर दिया गया.
लोक सभा एवं विधानसभाओं की अवधि को   5 साल से बढाकर 6 साल कर दिया गया.


44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978

राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा ‘आंतरिक       अशांति’ के आधार पर नही की जा सकती, बल्कि सशस्त्र विद्रोह के कारण की जा सकेगी.
संपत्ति के मूल अधिकार को विधिक अधिकार में परिवर्तित कर दिया गया.
लोक सभा तथा विधान सभाओं की अवधि को 6 साल से घटाकर 5 साल कर दिया गया.
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को शक्तिशाली बनाया गया. 

52वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1985

संविधान में दसवीं अनुसूची को जोड़कर दल-बदल को रोकने के लिए कानून बनाया गया.

61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1989

मतदान करने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से 
   घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी.

71वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992

कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली भाषाओँ को 8वी अनुसूची में शामिल किया गया.

73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1993

पंचायती राज संबंधी प्रावधान किये गए.
11वीं अनुसूची जोड़ी गयी.

74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1993

12वीं अनुसूची जोड़ी गयी तथा नगरपालिकाओं 
   के गठन संबंधी प्रावधान किये गये.

86वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002

संविधान में अनुच्छेद-21(क), 45 तथा 51(क)(ज्ञ) जोड़ा गया.
राज्य द्वारा 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को  निशुल्क: और अनिवार्य सेवा का प्रावधान किया गया.

87वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

परिसीमन में जनसँख्या का आधार 1991 की जनगणना के स्थान पर 2001 कर दिया गया.

91वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

दल-बदल व्यवस्था में संशोधन किया गया. अब केवल सम्पूर्ण दल के विलय को मान्यता है.
केंद्र तथा राज्यों में मंत्रिपरिषद की संख्या क्रमश: लोक सभा तथा विधान सभा की सदस्य संख्या 15% से अधिक नहीं होगी.

92वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003

डोगरी, मैथिली, बोडो और संथाली भाषाओँ को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया.

94वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2006

अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए एक 
   मंत्री का प्रावधान मध्य प्रदेश एवं ओडिशा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में भी किया गया.

96वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011

‘उड़िया’ भाषा का ‘ओडिया’ में परिवर्तन किया 
   गया.

97वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2011

इस संशोधन के द्वारा सहकारी समितियों को एक संवैधानिक स्थान एवं संरक्षण प्रदान किया गया.

98वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2012

संविधान में अनुच्छेद 371(J) शामिल किया गया. इसका उद्देश्य कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के विकास हेतु कदम उठाने के लिए सशक्त करना था.

99वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2013

यह अधिनियम प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायिक
   नियुक्ति आयोग (N.J.A.C) की संरचना एवं कामकाज हेतु संविधान की विभिन्न अनुच्छेद 124(2),127(1), 128, 217(1) व (2) तथा 224(क) में संशोधन किया गया.

100वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2014

इस विधेयक का उद्देश्य भारत एवं बांग्लादेश के मध्य 41 वर्ष पुराने भू-सीमा समझौता L.B.A 1974 को प्रभाव में लाना है.

महत्वपूर्ण अनुच्छेद (Article)

जिस समय संविधान का निर्माण हुआ उस समय संविधान में 395 अनुच्छेद थे, परन्तु अब अनुच्छेदों की संख्या 498 हो गयी है। संविधान के कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेदों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

          अनुच्छेद (Article)
        प्रावधान (Provision)
·                    (Article) अनुच्छेद 1

संघ का नाम और उसका राज्य क्षेत्र
·                    (Article)अनुच्छेद 2

नए राज्यों का प्रवेश व स्थापना
·                     (Article) अनुच्छेद 3
नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रो, सीमाओं और नामों में परिवर्तन
·                     (Article) अनुच्छेद 5-11

नागरिकता के प्रावधान
·                     (Article) अनुच्छेद 12-35


मौलिक अधिकारों के प्रावधान
·                    (Article) अनुच्छेद 36-51

·                     (Article) अनुच्छेद 51(क)

·                     (Article) अनुच्छेद 52-73

भारत के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
·                     (Article) अनुच्छेद 74-75

मंत्रिपरिषद की व्यवस्था एवं उसके कार्य
·                     (Article) अनुच्छेद 76

भारत का महान्यायवादी (Attorney General of India)
·                     (Article) अनुच्छेद 79

·                     (Article) अनुच्छेद 80

·                     (Article) अनुच्छेद 81

·                     (Article) अनुच्छेद 89

राज्य सभा का सभापति एवं उपसभापति (Chairman and Deputy Chairman of Rajya Sabha)
·                     (Article) अनुच्छेद 93

लोकसभा का अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
·                     (Article) अनुच्छेद 108

कुछ दशाओं में दोनों सदनों (लोक सभा एवं राज्य सभा) की संयुक्त बैठक
·                     (Article) अनुच्छेद 109

धन विधेयक (money bill) के सम्बन्ध में विशेष प्रक्रिया
·                     (Article) अनुच्छेद 110

धन विधेयक (money bill)   की परिभाषा
·                     (Article) अनुच्छेद 112

वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual financial statement)
·                     (Article) अनुच्छेद 124

उच्च्तम या सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना और गठन
·                     (Article) अनुच्छेद 143

सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति
·                     (Article) अनुच्छेद 148

भारत की नियंत्रक महालेखा परीक्षक (Comptroller Auditor General of India)
·                     (Article) अनुच्छेद 149
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कर्तव्य और शक्तियां
·                     (Article) अनुच्छेद 153-162

राज्यपाल (Governor) की नियुक्ति व अधिकार
·                     (Article) अनुच्छेद 163-164

राज्य की मंत्रिपरिषद
·                    (Article) अनुच्छेद 165

राज्य की महाधिवक्ता (Advocate General of state)
·                     (Article) अनुच्छेद 168-177

राज्य का विधानमंडल (State Legislature)
·                     (Article) अनुच्छेद 178-187

राज्य विधानमंडल के अधिकारी
·                     (Article) अनुच्छेद 188-193

राज्य विधानमंडल का कार्य संचालन
·                     (Article) अनुच्छेद 216

उच्च न्यायालय (high court) का गठन
·                     (Article) अनुच्छेद 226

कुछ रिट (writ) जारी करने की उच्च न्यायालय की शक्ति  
·                     (Article) अनुच्छेद 233

जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment of district judges) 
·                     (Article) अनुच्छेद 239-241

संघ राज्य क्षेत्र (Union Territory)
·                     (Article) अनुच्छेद 243-243(ण)

पंचायती राज का गठन व इसके अन्य उपबंध
·                     (Article) अनुच्छेद 243(त)-                    243(य, छ)

नगरपालिकाएं (Municipalities) व इसके अन्य उपबन्ध
·                     (Article) अनुच्छेद 248

अवशिष्ट विधायी शक्तियां (residuary powers of legislation)
·                     (Article) अनुच्छेद 249

राज्य की सूचि के विषयों के सम्बन्ध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति
·                     (Article) अनुच्छेद 250

यदि आपात की उद्घोषणा (Proclamation of Emergency) प्रवर्तन में हो तो राज्यसुची के विषय के सम्बन्ध में विधि बनाने की संसद की शक्ति
·                     (Article) अनुच्छेद 253

अन्तराष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान
·                     (Article) अनुच्छेद 262

अंतर्राज्यिक (Interstate) नदियों या नदी के जल सम्बन्धी विवादों का न्यायनिर्णयन
·                     (Article) अनुच्छेद 263

अंतर्राज्य परिषद् (Interstate Council) के संबंध में उपबंध
·                     (Article) अनुच्छेद 266

भारत और राज्यों की संचित निधियों (Consolidated funds) और लोक लेखा (Public Accounts Committee)
·                     (Article) अनुच्छेद 267

आकस्मिक निधि (Contingency fund)
·                    (Article) अनुच्छेद 280

वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन
·                     (Article) अनुच्छेद 300(क)

विधि के प्राधिकार के बिना व्यक्तियों को संपत्ति से वंचित न किया जाना
·                     (Article) अनुच्छेद 312

अखिल भारतीय सेवाएँ
·                     (Article) अनुच्छेद 315

संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग (public service Commission)
·                     (Article) अनुच्छेद 324

भारत का निर्वाचन आयोग (Election commission of India)
·                     (Article) अनुच्छेद 326

लोक सभा और राज्यों की विधान सभाओं के लिए निर्वाचन में व्यस्क मताधिकार का होना
·                     (Article) अनुच्छेद 330

लोक सभा में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण
·                     (Article) अनुच्छेद 331

लोक सभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व
·                     (Article) अनुच्छेद 332

राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण
·                     (Article) अनुच्छेद 333

राज्य की विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व
·                     (Article) अनुच्छेद 343

संघ की भाषा
·                     (Article) अनुच्छेद 344

राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति
·                     (Article) अनुच्छेद 348

सर्वोच्च न्यायलय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा
·                     (Article) अनुच्छेद 350(क)

प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधायें
·                     (Article) अनुच्छेद 351

हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश
·                     (Article) अनुच्छेद 352

आपात की उद्घोषणा
·                     (Article) अनुच्छेद 356

राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध
·                     (Article) अनुच्छेद 358

आपात के दौरान अनुच्छेद 19 के उपबंध का निलंबन
·                     (Article) अनुच्छेद 360

वित्तीय आपात (Financial emergency) के बारे में उपबंध
·                     (Article) अनुच्छेद 368

संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया
·                     (Article) अनुच्छेद 370
जम्मू-कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थाई उपबंध

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